यूसिल की शिक्षा व्यवस्था को मूंह चिढ़ा रहा है उसी की भ्रष्टाचार की कोख से जन्मा अवैध रूप से संचालित स्कूल यूसिल अधिकारियों के संरक्षण में अपराधी टिकी मुखी हर महीने कर रहा है लाखों की अवैध कमाई सिरमा ने कारवाई की मांग की

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जमशेदपुर : भारत सरकार के सबसे महत्वपूर्ण एवं अतिसंवेदनशील सुरक्षा वाला संस्थान यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड को पिछले कुछ वर्षों में यूसिल सीएमडी कार्यालय सम्पदा विभाग एवं कार्मिक विभाग के कुछ चुनिन्दा भ्रष्ट अधिकारीयों की तिकड़ी ने मिलकर भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है l आलम ये है की ये सभी अधिकारी जिसमे कविता सुनने के शौक़ीन तकनिकी निदेशक राजेश कुमार भी शामिल रहे हैं के संरक्षण में यूसिल के पूर्व सफाई कर्मचारी रसिक मुखी के पुत्र तथा जादूगोड़ा के नामचीन अपराधी टिकी मुखी ने भ्रष्टाचार का नंगा नाच किया l इस बात का खुलासा सामाजिक कार्यकर्त्ता सिरमा देवगम द्वारा यूसिल सीएमडी को लिखे शिकायती पत्र से हुआ l सिरमा देवगम ने यूसिल सीएमडी से सीधा सवाल पुछा है की एक मामूली सफाई कर्मचारी रसिक मुखी का पुत्र टिकी मुखी यूसिल कम्पनी के भ्रष्ट अधिकारीयों को ऐसा कौन सा लाभ पहुंचा रहा था की उसे मुफ्त आवास और होटल का आवंटन सभी नीति नियमो को ताक पर रखकर कर दिया गया ?

                                            अवैध स्कूल का संचालन करता टिकी मुखी का भाई कुशो मुखी

वैसे इस सवाल का जवाब तो यूसिल के कार्मिक महाप्रबंधक राकेश कुमार के पास भी नहीं है l होगा भी कैसे किसी भी गैर कर्मचारी को मुफ्त आवास आवंटन का नियम कभी यूसिल में बना ही नहीं l ऐसे में एक गंभीर सवाल ये भी उभर कर सामने आ रहा है की तो फिर राकेश कुमार इस प्रकरण की जांच कर कोई कारवाई क्यों नहीं कर रहे ? उन्हें ऐसा करने से कौन रोक रहा है ?

अब अगर यूसिल आवासीय कॉलोनी परिसर के गाँधी मार्केट में टिकी मुखी और उसके तथाकथित कागजी संस्था मुखी समाज विकास समिति को अवैध रूप से आवंटित होटल की बात करें तो अभी उसमे टिकी मुखी ने अपनी मर्जी से एक स्कूल खोल दिया है l जिसके लिए यूसिल के किसी भी अधिकारी की कोई अनुमति नहीं है l अब सवाल ये है की यूसिल की संपत्ति को अपने तरीके से संचालित करने का अधिकार इसे किसने दिया ? इसका भी जवाब यूसिल के किसी भी अधिकारी के पास नहीं है l आम लोगों के बीच अब ये सवाल तैरने लगा है की जिस टिकी मुखी को सीआईएसएफ के जवानों ने बीच सड़क पर पटक कर मारा पूरी कॉलोनी में दौड़ा – दौड़ा कर पीटा और यहाँ से बाहर निकाला उसे फिर से इस यूसिल कॉलोनी में ला कर किसने और क्यों बैठाया ? कई घोटालों के आरोपों से घिरे यूसिल के पूर्व सीएमडी दिवाकर आचार्य का क्या इसमें कोई निजी स्वार्थ था ?  जबकि ये सर्वविदित है की टिकी मुखी एक नामचीन अपराधी है और ऐसे लोगो यदि इस संस्थान के भीतर रहेंगे और कम्पनी के कार्यालयों में आते – जाते रहेंगे तो ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है l  सिरमा देवगम ने तो सीधा ये आरोप लगाया है की टिकी मुखी को जो आवास आवंटित किया गया है उसमे जिले और जिले से बाहर से पेशेवर अपराधी आकर जमावड़ा लगाते हैं अपराध की योजनायें बनती है और फिर उसे किर्यान्वित किया जाता है l चूँकि यूसिल कॉलोनी आबादी से दूर एक सुरक्षित आवासीय क्षेत्र है तो यहाँ होने वाली गतिविधियों पर जबतक नज़र न रखी जाये किसी को भनक भी नहीं लगेगी की अन्दर क्या हो रहा है ?

परमाणु उर्जा विभाग द्वारा परमाणु उर्जा शिक्षा संस्थान के मध्यम से देश भर में अपनी इकाईयों में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारीयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए परमाणु उर्जा केन्द्रीय विद्यालयों की स्थापना की गयी है l जादूगोड़ा में भी के जी कक्षा से लेकर 12वी तक की पढाई के लिए विद्यालय स्थापित किये गए हैं l तो क्या परमाणु उर्जा शिक्षा संस्थान के ये सभी स्कूल अब यूसिल के अधिकारीयों और कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण  शिक्षा देने में विफल साबित हो रहे है जो कम्पनी  के भ्रष्ट अधिकारी  अपने ही कॉलोनी परिसर में एक अवैध ढंग से संचालित स्कूल चलवाने को मजबूर हो गए है ? अगर ऐसा है तो वाकई ये गंभीर चिंता का विषय है l मगर जब इन विद्यालयों के शिक्षको से बात की गयी तो उन्होंने अपने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के संकल्प को पूरी दृढ़ता से दोहराया l ऐसे में एक सवाल फिर उभर कर सामने आता है की कहीं यूसिल के भ्रष्ट अधिकारीयों तक इस अवैध स्कूल से होने वाली लाखों की आमदनी का हिस्सा तो नहीं जा रहा है ? वरना गाँधी मार्केट परिसर में अगर कोई दुकानदार एक इंच जगह अधिक बढ़ा ले तो उसका बिजली तक काट देने वाला यूसिल प्रबंधन टिकी मुखी के इस अवैध स्कूल उसके अवैध कमाई और अवैध निर्माण पर बिलकुल खामोश क्यों है ? यह एक गंभीर प्रश्न है जिसका जवाब भी जल्द ही लोगों के सामने आएगा l

   यूसिल के पूर्व तकनिकी निदेशक राजेश कुमार 

वैसे कम्पनी के सूत्र बताते हैं की टिकी मुखी ने यूसिल के रंगीन मिजाज अधिकारीयों की पूरी टीम को काम पर लगा रखा है l इसके लिए वो उन्हें हर मुमकिन सुविधाएँ मुहैया करवाता है l यह सर्वविदित है की यूसिल के पूर्व तकनिकी निदेशक राजेश कुमार इस नामचीन अपराधी को संरक्षण देने में किस कदर मेहरबान रहे l सूत्र बताते है की राजेश कुमार कविता सुनने के बड़े शौक़ीन थे l टिकी मुखी ने उनके कविता सुनने के शौक का भरपूर ख़याल रखा l यही कारण है की टिकी मुखी को संरक्षण देना उसकी मजबूरी बन गयी l वरना एक अदने से सफाई कर्मचारी के पुत्र की क्या मजाल की बिना बड़े साहब के संरक्षण के वो भ्रष्टाचार का इतना मंजा हुआ खेल खेल ले l

यह बात तो साफ़ है की टिकी मुखी को दूकान आवंटन में नियमित टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ l यदि ऐसा होता तो यूसिल से सम्बंधित बहुत से आदिवासी विस्थापित संगठन हैं उन्हें इस बात की खबर होती अखबार में खुली निविदा का प्रकाशन किया गया होता l मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ l जाहिर है यूसिल के पूर्व सीएमडी दिवाकर आचार्य ने टिकी मुखी को उपकृत करते समय ये भी नहीं सोचा की उनके ऐसा करने से भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा खतरे में पड़ जायगी l उन्हें तो बस इस सफाई कर्मचारी के पुत्र टिकी मुखी को ये दिखाना था की एक सीएमडी की पॉवर क्या होती है ? मगर दिवाकर आचार्य ये भूल गए की कानून से ऊपर कोई नहीं और बात जब खुलती है तो हर रसूखदार आदमी कठघरे में खड़ा हो जाता है ?

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